शहद के चमत्कारी गुण

आयुर्वेद गर्न्थो के अनुसार शहद पचने में आसान है जिनका पाचन कमजोर है शहद उन लोंगो के लिए वरदान है ऐसा माना जाता है की यह सभी प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिये लाभकारी है यह अग्निवधक और ऊर्जा प्रदान करने का बढ़िया स्रोत है यह स्वर सुधारक और नेत्रों के लिए लाभदायक हैं खाँसी कुष्ट अरूचि कृमि प्यास वमन अतिसार एवम रोग इत्याति में उच्च तैर पर प्रभवशाली है सुन्दरता को बढ़ाने में मदद करता है एवम्र कोमल तथा चमकदार त्वचा प्रदान करता है दुर्बल ह्रदय को शक्ति देता है एवम चर्म रोगों जैसे फोड़े फुन्सी दाद खाज आदि में अति उत्तम है ।

शहद से सम्बंधित अन्य जरूरी बातें

शहद को कभी भी घी या तेल के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर नही खानी चाहिये ।

शहद को गर्म करके पीने से मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है अतः शहद को गर्म करके नही लेना चाहिए इसी प्रकार धूप में चलकर आने के तुरन्त बाद या परिश्र्म से शरीर मे गर्मी होने पर शहद का प्रयोग न करें ।

मॉस मछली अण्डा कटहल मूली पतेदार सब्जी बड़हल चीनी गुड़ मिश्री वसा युक्त पदार्थ बर्फ आदि के साथ शहद का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिये।

सामान्यत एक बार मे अधिक तीन तोले मधु का सेवन करना चाहिये छोटे बच्चों को आधा चम्मच से ज्यादा शहद नहीं देना चाहिये ।

लाभ.

बच्चो जवान तथा किसी बीमारी से उठे कमजोर व्यक्ति को उचित मात्रा में शहद का सेवन अवश्य करना चाहिये क्योंकि यह शरीर को शीघ्र ही बलवान बनाता है और भूख बढ़ाता हैं ।

शहद में श्री तुलसी की 2-3 बुंदे डालकर सुबह शाम चाटने से बुखार खाँसी जुखाम मलेरिया पेट दर्द पीलिया ब्लड प्रेशर आदि में लाभ मिलता है ।

रात को सोते समय एक गिलास गुनगुन पानी मे एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें । इस प्रयोग से सुबह पेट साफ हो जाता हैं। एक चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार लेने से पेट के कीड़े मर जाते है ।

माथे पर शहद का लेप करने से कुछ ही देर में सिर का दर्द जाता रहता है शहद को सलाई की सहायता से काजल की तरह आँख में लगाने से आंखों के रोगों में लाभ होता है।

उपयोग-

5-10 मि.ली शहद को दिन में दो बार सुबह व शाम को सेवन करें या चिकित्सक के निर्देशानुसार इस्तेमाल करें।

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