वर्षा और अस्मा दोनों दस साल की थीं. कर्नाटक के हुबली के सत्तूर में रहतीं थीं. 17 दिसंबर 1998 को उन्होंने खुद को आग लगा ली. वजह ये बताई गई कि उन्हें लगता था ऐसे में शक्तिमान उन्हें बचाने आएगा.बेगूसराय बिहार में 27 दिसंबर 1998 को शुभम और राकेश नाम के दो लड़कों ने खुद को आग लगा ली. वजह बताई गई कि ऐसा शक्तिमान देखकर किया.14 फरवरी 1999 को नासिक के पाटने जिले के दिनेश प्रभाकर ने खुद को आग लगा ली. दिनेश नौ साल का था. उसकी मौत की वजह भी वही बताई गई. उसे लगता था शक्तिमान उसे बचाने आएगा.

लेकिन तथ्य कुछ और कहते हैं

वर्षा कुलकर्णी और अस्मा लत्तिअपानवार ने एक दूसरे को गुस्से में आग लगा दी थी. वर्षा उस आग के चलते मारी गई. उन दोनों के पास टीवी का एक्सेस नहीं था. उनने शक्तिमान देखकर ऐसा नहीं किया था.बिहार के मामले में इंडिया टुडे मैगजीन ने तफ्तीश की. पता चला कि ऐसी कोई बात नहीं थी. पुलिस ने खुद कहा कि रिपोर्ट गलत थी.तीसरे मामले में पुलिस ने कहा कि शक्तिमान का कोई जिक्र नहीं है दिनेश ने चाय बनाते हुए खुद को जला लिया था. जलने के बाद न दिनेश ने न ही उसके मां-बाप ने कहीं शक्तिमान का कोई नाम लिया थामुकेश खन्ना और उनसे जुड़े लोग जो वजह बताते हैं उनके मुताबिक़ मुकेश खन्ना बीजेपी के सपोर्टर थे, कई लोगों को ये बात पसंद नहीं थी.गुटखा और सुपारी बेचने वालों को शक्तिमान की सीख के कारण बिजनेस में नुकसान हो रहा थाशक्तिमान दूरदर्शन पर लोकप्रियता के पैमाने में चौदहवें नंबर पर जा पहुंचा था, उसकी टीआरपी भी उस वक़्त 24.8 तक जा पहुंची थी. कुछ लोगों का जलना तो बनता था.शुरू से जुड़े होने के कारण मुकेश खन्ना पारले-जी के अलावा और किसी कंपनी को स्पॉन्सर नहीं बना रहे थे.

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