चिल्लर इस तरह के कारोबारियों के लिए उत्पन्न कर रही हैं इतनी बड़ी समस्या …….केंद्र व प्रदेश सरकार जहां आम व खास के लिए एक और बजट पेश करने की तैयारियों में लगी हुई है, वहीं कुछ दिनों से देखा जा रहा है भारतीय सिक्कों के प्रति लोगों की मानसिकता बदलती दिखाई दे रही है. कभी पहले खुले सिक्को की काफी मांग रहा करती थी. जरूरत के वक़्त सिक्के मिलना आसान नहीं हुआ करता था. बार-बार बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे, किन्तु कुछ दिनों से देखा जा रहा है. छोटे बड़े व्यापारियों के पास सिक्को की भारी रेजगारी इकठ्ठा हो गई है.

अब ना तो ग्राहक खुले सिक्के लेते है और ना ही बैंक खुली रेजगारी को जमा कर रहा है. आर बी आई की गाइडलाईन का हवाला देकर बैंक द्वारा रेज़गारी लेने से मना कर दिया जाता है. साथ मे बैंकों में भी भारी मात्रा में सिक्को की रेजगारी इकठ्ठा हो रही है. इनका सर्कुलेशन नहीं हो पा रहा. सभी बैंकों व व्यापारियों के सामने एक नई दिक्कत आकर खड़ी हो गई है. सिक्कों की रेजगारी इन दिनों छोटे व्यापारियों के समक्ष एक बड़ी सम है.

गांव, ढाणी व कस्बो के व्यापारियों को अपना धंधा चलाने के लिए भारतीय मुद्रा के हर किस्म के रुपये लेने होते है. विशेष कर खुले रेजगारी का सहारा लेना पड़ता है. जिससे उनके व्यापार की गति बनी रहती है, किन्तु इन दिनों देखा जा रहा है. छोटे व्यापारियों के पास खुली रेजगारी हजारों रुपयो में इकठ्ठा हो जाती है. कुछ व्यापारियों के पास खुले रेजगारी के कट्टे भरे हुए है, जिनको उठाना भी कठिन हो जाता है

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