Arthritis in hindi आर्थराइटिस या गठिया जिसे संधिशोथ भी कहा जाता है आजकल बुजुर्गों से लेकर जवान लोगो तक हर किसी को अपनी चपेट में लेते जा रहा है आपके शरीर के जोड़ों में सूजन उत्पन्न होने पर गठिया होता है या आपके जोड़ों में उपास्थि (कोमल हड्डी) टूट हो जाती है तब येसा होता है। शरीर के जोड़ ऐसे स्थल होते हैं जहां दो या दो से अधिक हड्डियाँ एक दूसरे से मिलती हैं जैसे कि कूल्हे या घुटने की हड्डियाँ। उपास्थि जोड़ों में गद्दे की तरह होती है जो दबाव से उनकी रक्षा करती है और क्रियाकलाप को सहज बनाती है। इस लेख में आप जानेगे आर्थराइटिस या गठिया के लक्षण, आर्थराइटिस के कारण और गठिया से वचाब के उपाय के बारें में।

गठिया के लक्षण –
जोड़ों में दर्द गठिया का सबसे आम लक्षण है।
जोड़ स्थिर नहीं रहते हैं या ऐसा महसूस होता है कि यह सहारा नहीं दे पायेगे।
जोड़ बड़े हो जाते हैं या सूज़न आ जाती है।
अक्सर सुबह के समय जोड़ो में अकड़न होना भी गठिया के लक्षण होते है ।
जोड़ का उपयोग ना कर पाना या उपयोग करने में कठिनाई होना ।
आपके जोड़ के आसपास गर्माहट।
जोड़ के आसपास की त्वचा पर लालीपन।

इन लक्षणों के आलावा रियुमेटॉयड आर्थराइटिस के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। यदि आप के कोई ऐसे लक्षण हो जिनसे आपको तकलीफ या चिंता होती है, तो अपने चिकित्सक से मिले और इन लक्षणों के बारें में बात करें।

गठिया का इलाज –
आर्थराइटिस का इलाज निम्न पर निर्भर है:

गठिया का कारण क्या है।
आपको कौन से जोड़ों में दर्द है।
आपके जोड़ के दर्द की मात्रा क्या है।
आर्थराइटिस आपकी दैनिक गतिविधियों को किस प्रकार प्रभावित करता है।
आपकी आयु क्या है।
आपका क्या कार्य करते है।
आपका चिकित्सक ये सुझाव दे सकता है –
दर्द और सूजन नियंत्रित करने के लिए दवाएँ।
शारीरिक या पेशेवर थेरेपी।
बाथटब या टॉयलेट के लिए सहायक उपाय जैसे कि डंडी या पकड़ने वाली छड़।
यदि आपका वजन जादा है तो वजन कम करना।
पुराने की जगह नया जोड़ लगाने के लिए सर्जरी।
गठिया से बचने के उपाय –
आपके इलाज रूप में, आपको जरूरत पड़ सकती है:
क्रिया और जोड़ की शक्ति में सुधार के लिए व्यायाम।
अच्छे विकल्पों में टहलना (walking), तैरना (swimming), साईकिल चलाना, नृत्य करना (dancing), शक्ति परीक्षण (strength training) और शरीर के हल्के खिंचाव वाले व्यायाम (stretching exercises) शामिल हैं।
दर्द और सूजन पर नियंत्रण के लिए गर्म या ठंडे पानी का प्रयोग।
उन स्थितियों और गतिविधियों से बचना जिनसे आपके दर्दयुक्त जोड़ों पर अतिरिक्त ज़ोर पड़ता हो।
किसी एक स्थिति में अधिक लंबे समय तक रहने से बचना।

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