ज़्यादातर लोग ऐसे होते हैं जो यह कहते हैं की परिवार की रिश्तों की जरूरत तब बहुत पड़ती है जब हम दुख में हो । हमारे यहाँ कौन आएगा जब हम किसी के नहीं जाएंगे । समाज का निर्माण ही दुख में अपनों का साथ मिल सके इसलिए होता है और भी कई तरह की सोच विचार लोगों के मन में बने हुए हैं ।

कुछ हद तक उनकी सोच सही भी है । पर आज हम इससे थोड़ी उल्टी बात करेंगे । हम कहते हैं की रिश्ते इसलिए नहीं हैं की मात्र अपने दुख बातें जाये । वह आपक्रे लिए सन्त्व्न का सपोर्ट नहीं है । वह आपकी खुशी को दोगुना कर देने के लिए भी हैं । बहुत जरूरी है रिश्तों में खुशी का बांटना भी । रिश्तों को कायम रखना भी सिर्फ मतलब के लिए ही नही रिश्ते हमारे जीवन में बहुत अहमियत रखते हैं ।

चाचा – ताऊ ,नाना नानी , मामा -मामी, मौसी , बुआ और भी कई तरह के रिश्ते होते हैं । उनमें से कुछ उम्र दराज होते हैं और कुछ आपकी उम्र से कुछ ही बड़े होते हैं । जो की आपको समझते हैं । दुख जब सबके साथ मिलकर कम किया जा सकता है । तो क्या खुशी सबके साथ मिलकर बांटने से बढ़ेगी नहीं । जिन लोगों ने सारी उम्र आपको बढ़ते हुए देखा आपको बहुत कुछ अच्छा सिखाया और इस लायक बनाया की आप उस खुशी को पाने के लायक बने हों । उनका उस खुशी पर कुछ हक़ तो बंता ही है ।

साथ ही क्या वह खुशी आपको अकेले में उतनी कारगर लगेगी जितनी की सबके साथ लगेगी । कोई आपको सलाह देगा की और क्या बेहतर किया जा सकता है । इसमें अभी क्या कमी रह गई । कोई और ज्यादा खुश होने की दुआ देगा आपके साथ उस खुसी में हँसेगा । इसलिए रिश्तों का सिर्फ दुख ही नहीं बल्कि सुख में भी साथ हो जरूरी है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here