कृत्रिम एवं बनावटी सौंदर्य प्रसाधन क्रीम, पाउडर आदि से मिला सौंदर्य अल्पकालिक एवं बनावटी होता है जबकि संतुलित खानपान से मिला सौंदर्य वास्तविक एवं टिकाऊ होता है। त्वचा से लेकर समस्त शरीरांगों पर हमारे खानपान की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

भोजन के माध्यम से हमारे शरीर के भीतर जो पहुंचता है वही शरीर पर झलकता है। शरीर के सभी अंगों की कार्यक्षमता इसी पर निर्भर है। त्वचा को रंग रूप, चमक इसी से मिलता है।

चेहरे की मुख्य समस्या त्वचा से पपड़ी निकलना, चिपचिपी होना, निस्तेज दिखना, कील, मुहांसे, झाइयां होना है। इन सबको पौष्टिक संतुलित भोजन एवं सही दिनचर्या से ठीक किया जा सकता है। शरीर के लिए सही आहार विहार आवश्यक है। उसकी सही देखभाल जरूरी है। त्वचा की रंगत इसी पर आश्रित है। सही शरीर एवं चमकदार नम त्वचा के बिना सौंदर्य अपूर्ण रह जाता है।

त्वचा पर पपड़ी बनना:- त्वचा के शुष्क होने से उस पर से पपड़ी बनकर उतरना आरंभ हो जाता है। यह शरीर में लूरीन नामक अधातु तत्व की कमी को प्रकट करता है। इसकी कमी से त्वचा की चमक कम हो जाती है। भोजन को बार-बार गरम करने से उसमें मौजूद लूरीन तत्व नष्ट हो जाता है। ऐसी स्थिति में कच्ची सब्जियां खाएं और ताजे फलों का सेवन ज्यादा करें। पत्ता गोभी, घर का बना पनीर खाना चाहिए। इसमें लूरीन की पर्याप्त मात्र होती है। यह त्वचा की रंगत में सुधार लाता है। इसके अलावा भोजन को बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए।

त्वचा चिपचिपी होना:- प्राकृतिक सोडियम की कमी से त्वचा चिपचिपी हो जाती है। यह नमक के रूप में हमें खानपान से मिलता है। यह सोडियम समस्त खाद्य पदार्थों में मूल रूप से मौजूद होता है। बाजार में मिलने वाले नमक में भी सोडियम होता है। इसकी तुलना में खाद्य पदार्थों का सोडियम अर्थात् नमक अधिक लाभदायी होता है। इसी सोडियम की कमी से त्वचा चिपचिपी होती है। उसमें झुर्रियां जल्द आती हैं।

खीरा एक ऐसी सब्जी/फल है जिसमें अत्यधिक सोडियम है। बिना छिलका उतारे खीरे के सेवन से शरीर में सोडियम की कमी दूर हो जाती है। इसके साथ ही साथ खीरा शरीर को ठंडा भी रखता है। शरीर में पानी पहुंचाता है। यह सर्वाधिक जलांश वाली सब्जी है। यह सलाद, रायता, सब रूप में उपयोगी है। यह पेट के रोगों को भी दुरूस्त करता है।

त्वचा पर ददोरा होना:- शरीर में सिलोकोन नामक तत्व की कमी से त्वचा पर ददोरे निकलते हैं। अंकुरित दाल, जौ, टमाटर, पालक, अंजीर, स्ट्राबेरी आदि जैसे खाद्य पदार्थों में सिलोकोन तत्व उपस्थित हैं। इनका सेवन करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां त्वचा को फटने से बचाती हैं।

त्वचा की अन्य समस्याएं:- त्वचा में कील, मुंहासे निकलना, झाई पडऩा, निस्तेज दिखना, विषैले तत्वों के शरीर में एकत्र होने एवं पानी की कमी से आरंभ होते हैं। ये विषैले तत्व टाक्सिंस के नाम से जाने जाते हैं। किडनी इन्हें शरीर से बाहर निकालती है। पानी की कमी से ये शरीर में जमा होकर अपना दुर्गुण दिखाते हैं। किडनी की कार्यक्षमता पानी पर निर्भर है। पर्याप्त पानी पीने, जलांश वाली सब्जी एवं फल के खाने से विषैले तत्व शरीर से बाहर निकलते हैं एवं त्वचा की समस्या दूर होती है।

कील मुंहासों को दूर करने हेतु तेज मिर्च, मसाले, तेल एवं तली भुनी चीजों से दूर रहें। भोजन का पाचन सही हो। कब्ज, अपच, अम्ल, गैस की परेशानी न हो। भोजन ताजा, सादा, सुपाच्य संतुलित एवं पौष्टिक हो। इसमें ताजे फल, सब्जी, सूप, रायता, जूस आदि शामिल हो। दिनचर्या सही हो। देर रात तक जागने से बचें। जल्द सोएं एवं जल्द जागें।

शांत व संतुलित रहें। नमक, शक्कर, तेल, घी की मात्रा न्यून कर दें। भोजन में दूध, दही, पनीर एवं फल, सब्जी के माध्यम से कैल्शियम एवं अन्य खनिज तत्वों की सही मात्रा मिले।

ध्यान रखें:-

– भोजन सदैव सही व संतुलित हो।

– पर्याप्त पानी पिएं।

– तेल, घी, नमक, शक्कर कम हो।

– तली भुनी चीजें न खाएं।

– जंक फूड व फास्ट फूड से बचें।

– सभी ड्रिंक्स से दूर रहें।

– धूम्रपान व नशापान न करें।

– ताजे मौसमी फल सब्जी पर्याप्त लें।

– 7-8 घण्टे की नींद लें।

– व्यायाम करें। आलस से बचें।

– सूर्य की तेज किरणों व विकिरण से बचें।

– भोजन सभी पोषक तत्वों वाला हो।

– तनाव, क्रोध, दुख आदि सभी मनोभावों से बचें

– चित्त, स्थिर रखें, शांत रहें।

– सदैव हंसते मुस्कुराते रहें।

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