रीमा जी पिछले कई दिनों से अपनी बहू अवनी में आए बदलाव को महसूस कर रही थी ।अवनी एक चुलबुली सी लड़की है उसकी हंसी मजाक से घर का कोना कोना महका रहता है ।अवनी अपनी सास की लाडली बहू है घर का पूरा काम मुस्कुराते हुए करती है अवनी जान है रीमा जी के घर की ना तो अवनी ने शिकायत का मौका दिया ना कभी रीमा जी ने उससे कोई शिकायत करी । दोनों के बीच एक सुलझा हुआ सा रिश्ता है। पर पिछले कई दिनों से अवनी जैसे हंस कर बात करना भूल गई हो कोई पूछे तो बेरुखी से जवाब देती कभी-कभी तो अपने बेटेपर अपनी चिड़चिड़ाहटनिकाल देती। रीमा जी एक सुलझी हुई महिला है। अवनी के व्यवहार के पीछे छिपी वजहको समझ गई थी। उनकी पारखी नजरों ने सब कुछ समझ लिया था।।

पहले तो रीमा जी की बेटी अपनी डिलीवरी कराने के लिए 5 महीने उनके पास रुक कर गई थी अवनी ने पूरे 5 महीने अपनी ननद और उनके बच्चे की पूरी देखभाल करी । हर काम मुस्कुरा कर किया ननंद रानी तो अपनी भाभी का तहे दिल से शुक्रिया करके गई ननंद रानी के जाते ही दूसरे दिन रीमा जी बाथरूम में फिसल गई पैर फैक्चर हो गया  । अवनी को फुर्सत अब तो मिलने का सवाल ही नहीं था अब अवनी रीमा जी की सेवा में लग गई। दिन रात  अपनी सासु मां की सेवा में लगी रही। घर से बाहर गए हुए तो उसको कोई कितना ही टाइम हो गया था अपने मायके जाना भी इस बार उसने कैंसिल कर दिया था। अवनी अपने लिए फुर्सत के पल बिल्कुल भी नहीं निकाल पा रही थी। जिम्मेदारियों के बोझ ने अवनी को थका दिया था । इस कारण उसका व्यवहार थोड़ा रुखा हो गया था।   रीमा जी को अवनी ने अपनी सेवा से एकदम फिट कर दिया था। रीमा जी ने सोचा अब मेरी बारी है मैं अपनी बहू को हरदम खुश देखना चाहती हूं वो जानती थी कि जब अवनी अपने लिए थोड़ा टाइम निकाल लेगी थोड़े दिन इन जिम्मेदारियों से निकलकर अपने लिए जी लेगी। तो वह पल उसको वापस तरोताजा कर देंगे  ।।      दूसरे दिन शाम को रीमा जी का बेटा ऑफिस से घर आया तब उन्होंने अवनी और अपने बेटे आकाश को अपने कमरे में बुलाया और अवनी को एक लिफाफा दिया और उसको खोलने के लिए बोला। अवनी ने लिफाफा खोला तो उसमें गोवा के दो टिकट थे  । अवनी बोली यह किसके लिए मां, रीमा जी बोली , तुम दोनों के लिए मेरे बच्चों मैं जानती हूं अवनीबेटा पिछले साल भर से तुम अपने मायके भी ना जा पाई।  ससुराल की जिम्मेदारियों के चलते। जिम्मेदारी और काम का बोझ किसी भी इंसान को थका देता है इंसान मुरझा जाता है ।

जेसे तुम मुरझा गई थोड़े से दिन अपने लिए जी कर आजा फिर वापस महक जाएगी। तू तो मेरा गुलाब का फूल है रे तेरी महक से ही तो हम सब महकते हैं तु मुरझा जाती है तभी सारा घर मुरझा जाता है। इसलिए बेटा जाओ और महक कर खुशबू बिखेरती हूई आजा। मैं भी अब एकदम फिट हूं मेरी कोई चिंता मत कर हम दादी पोते साथ में रहेंगे और तुम मियां बीवी अपना दूसरा हनीमून बना कर आ जाओ  रीमा जी ने अवनी के गाल पकड़ लिए। अवनी शर्मा गई और अपनी सासू मां के गले लग कर बोली आई लव यू सासू मां आप जैसी सास सबको मिल जाए तब इस दुनिया में कोई भी बहू दुखी नहीं रहेगी उसके पास हमेशा उसकी परवाह करने वाली मां होगी सास के रूप में। आकाश ने जोर से हंस कर बोला आखिर मां किसकी है और पूरा घर मुस्कुराहट से गूंज गया। आपको मेरी कहानी कैसी लगी। कुछ सासु माय ऐसी भी होती है जो अपनी बहू का दुख दर्द समझती है।

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