बता दें कि भारत में लगभग 260 हेलिकॉप्टरऔर 200 चार्टेड प्लेन्स हैं। इस बीच, इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने महीनों पहले ही देश के लगभग 60 फीसदी हवाई जहाजों की बुकिंग करा ली है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जितनी आक्रामक तरीके से हेलिकॉप्टर की बुकिंग इस बार हुई है, वैसी पहले कभी नहीं हुई।

उधर, कांग्रेस की शिकायत है कि उसके पास बुकिंग के लिए जहाज ही नहीं हैं। इस बार एक और ट्रेंड यह दिख रहा है कि कई स्थानीय दल , खासतौर पर महागंठबंधन की पार्टियां एक दूसरे के साथ हेलिकॉप्टर की शेयरिंग भी रह रही हैं। यह भी जानकारी मिली है कि आम दिनों के मुकाबले हेलिकॉप्टर के प्रति घंटे के किराए दोगुने -तिगुने तक हो गए हैं। मतलब साफ है कि एक नेता के एक दिन के प्रचार के लिए पार्टियों को 10-15 लाख रुपए तक खर्च करना पड़ सकता है। जितनी देर हेलिकॉप्टर खड़ा रहेगा उसका भी किराया देना होगा।

सबसे ज्यादा हेलिकॉप्टर पवन हंस के पास हैं जिसके बाद ग्लोबल वेक्ट्रा हेलीकॉर्प का नंबर आता है। प्राइवेट कंपनियों में जेट कंपनियों क्लब वन एयर और ताज एयर जैसी कंपनियों के पास अच्छी फ्लीट है। इस बार दक्षिण भारत से भी काफी मांग आ रही है। इंडस्ट्री को लगता है कि अगर नेताओं में हेलिकॉप्टर का क्रेज यू हीं बढ़ता रहा तो इस जरूरत को पूरा करने के लिए बाहर से चॉपर और छोटे जहाज लीज पर मंगाने होंगे।

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