सावन के सोमवार अगर आप भी मन से महादेव की पूजा करते हैं और सच्चे मन से व्रत रहते हैं तो आपको अपना मन भी साफ रखना चाहिए बरना ये पूजा पथ और व्रत सब व्यर्थ है क्योंकि आप आपने मन और आत्मा को शांत रखेंगे तो महादेव भी आपसे उतने ही प्रसन्न होंगे जितना आप उन्हें करना चाहते हैं हैं आज हम आपको बताएंगे ये सावन का महीना आपको किस तरह और किस भावना से भगवान शिव के ध्यान में बिताना है आप अपने मन से कुछ ये बातें त्याग दें और सुख शांति से भगवान शिव का व्रत रहें

क्रोध करने से रहें दूर

क्रोध करना तो वैसे भी नुकसानदायक होता है। क्रोध में लिए गए फैसले अक्सर हमें हानि पहुंचाते हैं। जब क्रोध आता है तो मन की एकाग्रता और विवेक क्षीण हो जाता है। ऐसे में मन अशांत होने से की गई पूजा निष्प्रयोज्य हो जाती है। लिहाजा यह व्यर्थ हो जाती है।

किसी का अपमान न करें .

वैसे तो हमें किसी का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। लेकिन सावन में किसी बुजुर्ग, अपने से बड़े, गुरुजनों, भाई-बहन, दोस्त, जीवन साथी या किसी निर्धन व्यक्ति का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए। सदैव इनको सम्मान दें।

बुरे विचार मन में न लाएं

घर में झगड़ा न करें

कहते हैं कि जिन घरों में क्लेश होता है, अशांति बनी रहती है वहां देवी-देवताओं का निवास नहीं होता है। झगड़ा करने से पूरे घर की शांति भंग हो जाती है। सावन में विशेष ध्यान रखें कि घर में या पति-पत्नी में विवाद न हो। एक-दूसरे की गलतियों को क्षमा करें। मन प्रसन्न रहेगा तो ध्यान भी पूजा में लगेगा और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

पौराणिक कथा

मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन चल रहा था तब समुद्र से विष का घड़ा निकला। लेकिन इस विष के घड़े को न ही देवता और न ही असुर लेने को तैयार हो रहे थे। तब विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए और समस्त लोकों की रक्षा करते हुए भगवान शंकर ने इस विष का पान किया था। विष के प्रभाव से भगवान शिव का ताप बढ़ता जा रहा था तब सभी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शंकर पर जल चढ़ाना शुरू कर दिया था। तभी से सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।

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