सुषमा स्वराज के पार्थिव शरीर के साथ एक युवती खड़ीं जाने इनके बारे में, वो इनकी बेटी बांसुरी स्वराज कौशल…पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह उनके घर से पार्टी मुख्यालय में रखा गया । इस दौरान सुषमा स्वराज के पार्थिव शरीर के साथ एक युवती नजर आई, जिसे मीडिया में देखने के बाद लोगों के बीच यह कौतुहल का विषय बन गया है कि आखिर वो कौन हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राजनीति दलों के दिग्गजों के साथ बातचीत करती नजर आईं। तो चलिए हम बता देते हैं कि काले सूट में नजर आने वाली यह युवती और कोई नहीं बल्कि सुषमा स्वराज की इकलौती पेटी बांसुरी स्वराज हैं, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के बाद इनर टेंपल से कानून में बैरिस्टर की डिग्री लेने के बाद अपने पिता की तरह क्रिमिनल लॉयर हैं।

बता दें कि बुधवार सुबह जब सुषमा स्वाराज का शव दर्शनों के लिए उनके घर में रखा गया तो उस दौरान काला सूट पहने एक युवती सक्रिय नजर आईं , वह सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल के बगल में खड़ी हुई थी। इस दौरान मीडिया में चेहरा दिखाई देने पर कई लोगों ने उसके बारे में जानना चाहा । तो बता दें कि असल में वह सुषमा स्वराज की बेटी थीं। सुषमा स्वराज ने वर्ष 1975 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से शादी की । सुषमा की ए‍क बेटी है जिसका नाम बांसुरी कौशल है ।

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और भारत सरकार की पूर्व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए अपराह्न 12 बजे पार्टी मुख्यालय, 6ए – दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली पर लाया जाएगा।

बांसुरी कौशल दिल्ली हाईकोर्ट और भारत के सुप्रीम कोर्ट में क्रिमिनल लॉयर हैं । बांसुरी ने पहली बार मीडिया का ध्यान उस समय आकर्षित किया था, जब यह खुलासा हुआ था कि सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की लीगल टीम में शामिल हैं। असल में ललित मोदी ने एक ट्वीट कर अपनी लीगल टीम को बधाई दी थी , जिसमें सदस्यों के नाम का जिक्र करते हुए उन्होंने बांसुरी समेत 8 वकील का उल्लेख किया था । उस दौरान पहली बार सामने आया था कि सुषमा स्वराज की बेटी वकील है ।

वहीं कुछ लोग सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल के बारे में भी जानने के इच्छुक हैं, उन्हें बता दें कि स्वराज कौशल भारत में एक क्रिमिनल लॉयर हैं । वह 34 वर्ष की आयु में भारत के सबसे युवा एडवोकेट जनरल थे, और 1990 से 1993 तक मिजोरम के गवर्नर थे । आज वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, और 1998 से 2004 तक संसद सदस्य रहे ।

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